अप्रैल की शुरुआत में ही हीटवेव का अलर्ट, भुज में 44.5 डिग्री पहुंचा तापमान
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 5-6 दिनों के दौरान सौराष्ट्र व कच्छ, दक्षिण हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी यूपी, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर हीटवेव चलने की संभावना है। इस दौरान राजधानी दिल्ली में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

अप्रैल की शुरुआत में ही देश के कई हिस्सों, विशेषकर उत्तर-पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में, गर्मी ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 6 से 10 अप्रैल के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में हीटवेव चलने की संभावना है। जबकि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में अगले तीन दिनों के दौरान बारिश हो सकती है।
शुक्रवार को गुजरात के भुज में अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सौराष्ट्र और कच्छ में कहीं-कहीं तो तापमान सामान्य से 5.1 फीसदी अधिक रहा है और हीटवेव का असर रहा। हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड में भी अधिकतम तापमान सामान्य से 3.1 से 5 डिग्री तक अधिक था। हालांकि, अगले सप्ताह उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है क्योंकि 8 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 5-6 दिनों के दौरान सौराष्ट्र व कच्छ, दक्षिण हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी यूपी, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर हीटवेव चलने की आशंका है। इस दौरान राजधानी दिल्ली में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 5-6 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिमी और मध्य भारत के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। अगले एक सप्ताह में महाराष्ट्र में अधिकतम तापमान 3-4 डिग्री तक बढ़ने का अनुमान है।
यह साल गर्मी के मामले में पिछले रिकॉर्ड तोड़ सकता है। पिछले दिनों मौसम विभाग ने कहा था कि अप्रैल से जून तक देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहने के आसार हैं, जिसके चलते हीटवेव की स्थिति और गंभीर हो सकती है। खासकर उत्तर-पश्चिमी, मध्य और पूर्वी भारत में हीटवेव के दिनों की संख्या में वृद्धि की संभावना जताई गई है।
उत्तर-पश्चिम भारत में जहां आमतौर पर 5-6 दिन लू चलती है, वहां 10-11 दिन तक गर्मी का प्रकोप रह सकता है। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन और अल नीनो प्रभाव को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की मांग में भी 9-10% की वृद्धि होने की संभावना है, जिससे ग्रिड पर दबाव बढ़ेगा।
पिछला साल, 2024 भारत में 1901 के बाद का सबसे गर्म साल रहा था। इस साल भी मार्च से ही कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है। कुल मिलाकर इस साल देश को और अधिक भीषण गर्मी के लिए तैयार रहना होगा।