केंद्र सरकार द्वारा चालू पेराई सीजन (2024-25) के दौरान 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने के करीब एक महीने के भीतर 5 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे हो चुके है। इसमें से 2 लाख चीनी का निर्यात हो चुका है। चीनी निर्यात का फैसला मिलों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है। निर्यात के लिए चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमत 44000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है।
चीनी उद्योग सूत्रों के मुताबिक, निर्यात के लिए चीनी के सौदे 44 हजार रुपये प्रति टन तक हो रहे हैं। अधिकांश निर्यात महाराष्ट्र की मिलों से हो रहा है। अफ्रीकी देशों, अफगानिस्तान और श्रीलंका समेत करीब दर्जन भर देशों को चीनी भेजी जा रही है। अब तक 2 लाख चीनी का निर्यात हो चुका है और 3 लाख टन निर्यात के सौदे हो चुके हैं। चीनी मिलों द्वारा निर्यात के लिए चीनी की कीमत को लेकर काफी मोलभाव किया जा रहा है। इसी वजह से कीमत 44 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है। ऐसे में महाराष्ट्र की कई चीनी मिलों द्वारा चालू पेराई सीजन में किसानों को गन्ने के लिए फेयर एंड रिम्यूनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) से अधिक कीमत का भुगतान किये जाने की संभावना बन रही है।
चीनी की कीमतें बढ़ी
चालू सीजन में चीनी के उत्पादन में गिरावट के चलते कीमतों में तेजी आई है। घरेलू बाजार में भी चीनी की कीमतें बढ़ गई हैं। महाराष्ट्र में चीनी की एक्स फैक्टरी कीमत 3800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रही है जबकि उत्तर प्रदेश में चीनी की एक्स फैक्टरी कीमत 4000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है। हालांकि, सरकार ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) 3100 रुपये प्रति क्विंटल तय कर रखा है जबकि चीनी मिलें इसे बढ़ाकर 3900 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रही हैं।
उत्पादन में गिरावट
चालू सीजन 2024-25 में चीनी उद्योग ने 270 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया है जो पिछले साल के मुकाबले करीब 50 लाख टन कम है। पिछले सीजन (2023-24) में 319 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। चीनी के बड़े उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने कि कमजोर फसल के चलते उत्पादन कम रहा है। उद्योग सूत्रों ने आशंका जताई है कि चीनी उत्पादन 270 लाख टन से भी नीचे जा सकता है।
सरकार ने चालू पेराई सीजन में गन्ना जूस और बी-हैवी मोलेसेज के जरिये 37.5 लाख टन चीनी का डायवर्जन एथेनॉल उत्पादन के लिए करने की अनुमति दी है। लेकिन सरकार ने इन दोनों श्रेणियों के लिए एथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है। ऐसे में चीनी की बेहतर कीमतों को देखते हुए चीनी मिलें एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का कम उपयोग कर सकती हैं। उस स्थिति में चीनी का कुल उत्पादन बढ़ सकता है।
निर्यात की संभावनाएं
उद्योग सूत्रों का कहना है कि हमारे पास 10 लाख टन निर्यात करने के लिए सितंबर, 2025 तक का समय है। इस साल बेहतर कीमत मिलने के चलते अगले साल अधिक निर्यात की संभावना है और यह 40 से 50 लाख टन तक पहुंच सकता है क्योंकि अगले दो साल गन्ने का अधिक उत्पादन होने का अनुमान है।
भारत ने सर्वाधिक 112 लाख टन चीनी का निर्यात वर्ष 2021-22 में किया था और उसी साल देश में रिकॉर्ड 360 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ था। साल 2022-23 में 63 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था। सरकार ने अक्तूबर, 2023 में चीनी निर्यात को रेस्ट्रिक्टेट लिस्ट में डाल दिया था और 2023-24 में चीनी निर्यात कोटा जारी नहीं किया था। इस साल सरकार ने 20 जनवरी को चीनी निर्यात पर प्रतिबंध हटाते हुए चालू सीजन में 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी।