अमेरिका ने भारत पर 27% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया, जानिए किन सेक्टरों पर होगा असर

भारत पर लगे 27 फीसदी टैरिफ से देश के निर्यात को नुकसान उठाना पड़ सकता है जिसका असर समूची अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। हालांकि, भारतीय फार्मा उद्योग के लिए राहत की बात है कि ट्रंप ने दवाओं को रिसिप्रोकल टैरिफ से बाहर रखा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। विश्व बाजार में अमेरिकी उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और अमेरिकी उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है, जिसका समूची वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा। इस ऐलान के बाद दुनिया भर में ट्रंप की आलोचना हो रही है। 

अमेरिका ने लगभग 100 देशों की सूची जारी की है, जिन पर 'डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ' लगाया गया है। इस सूची में भारत भी शामिल है जिस पर 27 फीसदी टैरिफ लगा है। ट्रंप द्वारा रेसिप्रोकल टैरिफ के ऐलान से दुनिया भर में उथल-पुथल मची और शेयर बाजारों में गिरावट आई है। जबकि सोने की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। 

अमेरिका द्वारा 10% की बेसलाइन ड्यूटी 05 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होगी जबकि विभिन्न देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ 09 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होंगे। विदेश व्यापार विशेषज्ञ और ज्वाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर बिस्वजीत धर का कहना है कि 10% बेसलाइन ड्यूटी और 27% अतिरिक्त टैरिफ मिलाकर भारत पर कुल 37% टैरिफ लगेगा। 

व्हाइट हाउस के मुताबिक, भारत अमेरिका पर 52 फीसदी टैरिफ लगाता है। अमेरिका ने विभिन्न देशों द्वारा उस पर लगाए गये टैरिफ से लगभग आधे के बराबर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए हैं। इस प्रकार चीन पर 34 फीसदी, जापान पर 24 फीसदी, वियतनाम पर 46 फीसदी, थाईलैंड पर 37 फीसदी और यूरोपीय संघ पर 20 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। इसके अलावा, अमेरिका ने विदेशों में निर्मित गाड़ियों और पुर्जों पर 25 फीसदी टैरिफ का ऐलान किया है। 

अमेरिका ने ब्रिटेन, सिंगापुर, ब्राजील जैसे कुछ देशों पर मात्र 10 फीसदी का बेसलाइन टैरिफ ही लगाया है। जबकि नई टैरिफ घोषणाओं में कनाडा और मेक्सिको का जिक्र नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ये टैरिफ एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए लागू किए हैं। 

रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि आज अमेरिका का लिबरेशन डे है। आज का दिन अमेरिका को फिर से समृद्ध बनने के तौर पर हमेशा याद किया जाएगा। यह हमारी आर्थिक स्वतंत्रता की घोषणा है। उन्होंने कहा कि हमारे देश और करदाताओं को 50 सालों से ठगा जा रहा है, लेकिन अब ऐसा नहीं होने वाला है। ...अब हमारे समृद्ध होने का समय है।

टैरिफ से छूट

अमेरिका ने कई उत्पादों को रेसिप्रोकल टैरिफ से छूट भी दी है। इनमें फार्मा, सेमीकंडक्टर, तांबा, ऊर्जा उत्पाद, लकड़ी के सामान और महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। ये ऐसे उत्पाद हैं जिन पर आयात शुल्क बढ़ने से अमेरिका में जरूरी चीजें महंगी होने की आशंका है। 

भारत पर असर 

अमेरिका राष्ट्रपति ने भारत का जिक्र करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री (मोदी) मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। मैंने उनसे कहा कि आप मेरे दोस्त हैं लेकिन आप हमारे साथ ठीक नहीं कर रहे हैं।" भारत के बारे में ट्रंप ने कहा कि कि वे हम पर 52 फीसदी टैरिफ लगा कर रहे हैं। कई दशकों से हम उनसे लगभग न के बराबर शुल्क ले रहे हैं।

अमेरिका भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। भारत ने वित्त वर्ष 2023-24 में अमेरिका को 77.52 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया था, जो इसके कुल निर्यात का लगभग 18 फीसदी है। अमेरिका द्वारा भारत पर 27% टैरिफ लगाने से भारतीय निर्यातकों को बड़ा झटका लगने की उम्मीद है। इससे भारत के सालाना निर्यात में 2 -7 अरब डॉलर तक की कमी आने का अनुमान है। 

अधिक टैरिफ का असर उत्पादों की कीमत, मांग, निर्यात और उत्पादन पर पड़ने की संभावना है। हालांकि, भारतीय फार्मा उद्योग के लिए राहत की बात है कि ट्रंप ने दवाओं को रिसिप्रोकल टैरिफ से बाहर रखा है। भारत हर साल अमेरिका को करीब 13 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात करता है। भारतीय जेनेरिक दवाओं के लिए अमेरिका एक प्रमुख बाजार है। 

भारत हर साल अमेरिका को 14 अरब डॉलर से अधिक के मोबाइल, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्यात करता है। टैरिफ का असर इस सेक्टर पर भी पड़ेगा। डायमंड और ज्वेलरी के आयात पर टैरिफ का ऐलान किया है, इसका असर भारत की डायमंड इंडस्ट्री पर पड़ेगा। इसके अलावा टेक्सटाइल और फुटवियर निर्यात पर भी टैरिफ की मार पड़ेगी। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे वियतनाम 46%, थाईलैंड, कंबोडिया 49% और ताइवान पर अधिक टैरिफ लगाने से भारत को फायदा हो सकता है। 

अमेरिका के टैरिफ लगाने से भारत के कृषि निर्यात पर असर पड़ने की संभावना है। इससे अमेरिका में भारतीय खाद्य उत्पाद महंगे होंगे और भारत के कृषि, डेयरी, सी-फूड, मीट व अन्य फूड उद्योगों की आमदनी घट सकती है। इसका असर अंतत: किसानों पर भी पड़ेगा। आयात शुल्क में बढ़ोतरी का असर उत्पादों की कीमत, मांग, निर्यात और उत्पादन पर पड़ता है जिससे पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।  

भारत की प्रतिक्रिया

भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा किए गए विभिन्न उपायों/घोषणाओं के निहितार्थों के असर का आकलन किया जा रहा है। भारतीय उद्योग और निर्यातकों सहित सभी हितधारकों से सलाह मशविरा किया जा रहा है। उधर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने टैरिफ मामले में भाजपा सरकार के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी टैरिफ भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगा। इससे सभी उद्योगों को खतरा है। 

अमेरिका लंबे समय से भारत पर ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, बादाम, अखरोट, पिस्ता, सेब और दालों पर शुल्क कम करने का दबाव बना रहा है। द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए भारतीय और अमेरिकी के बीच विचार-विमर्श चल रहा है। माना जा रहा है कि भारत कुछ अमेरिकी उत्पादों जैसे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा बादाम व सेब जैसे कृषि उत्पादों पर टैरिफ में कटौती कर सकता है। हालांकि, अमेरिका पर पलटवार कर जवाबी टैरिफ लगाना भी एक विकल्प है, लेकिन भारत के मौजूदा ऊंचे टैरिफ के चलते इसकी संभावना कम है। इससे अमेरिका के साथ संबंध बिगड़ने का भी खतरा है। अब देखना होगा कि अमेरिका के टैरिफ का भारत क्या जवाब देता है।

क्या होता है रेसिप्रोकल टैरिफ?

रेसिप्रोकल टैरिफ एक प्रकार का आयात शुल्क है जो किसी देश में आयात होने वाले उत्पादों पर लगता है। अमेरिका में रेसिप्रोकल टैरिफ बढ़ने से विभिन्न देशों के उत्पादों को अमेरिकी बाजार में पहुंचाना महंगा हो जाएगा। यहा अमेरिका के घरेलू उद्योग के लिए फायदेमंद होगा।

आम भाषा में इसे “जैसे को तैसा” टैक्स कह सकते हैं। अगर कोई देश अमेरिकी सामानों पर अधिक आयात शुल्क लगाता है, तो बदले में अमेरिका भी उस देश से आयात होने वाली वस्तुओं पर अधिक आयात शुल्क यानी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा।